Monday, June 7, 2010

सिर्फ़ बगावत , बगावत और बगावत

मैं बगावती हूं । इस समाज का बगावती । इस देश का बगावती । एक ऐसा बागी जो हर अन्याय हर अपराध चाहे वो बौद्धिक हो या मानसिक के विरूद्ध बगावत करने का मन बना चुका है । ये मेरी पहली और आखिरी पोस्ट होगी । मैं तटस्थ रहकर सिर्फ़ और सिर्फ़ पढने का काम करूंगा । कोई पोस्ट नहीं लिखूंगा । और हर उस ढोल को फ़ाडूंगा जो शोर मचा कर शांति को भंग करने में लग जाते हैं ।मेरा कोई अपना पराया नहीं , मेरे लिए कोई बडा छोटा नहीं । मेरे लिए कोई महान या क्षुद्र नहीं है । और न ही मैं कोई पंच हूं । एक बगावती हूं , सिर्फ़ एक बगावती । अब बगावत का भी असर देखने को तैयार हो जाओ लोगों ।

5 comments:

  1. ...पर देख समझ के कूंदा-कांदी करना भाई जी !!!!!

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  2. .... कहीं दादा जी तथा पापा जी मिलें तो उनको समझाना ... वे कहीं भी जंपिंग-डंपिंग करने लगते हैं ...!!!

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  3. उदय ,चिंता मत करो ये दादा जी , पापा जी सब बरसाती केंचुए हैं खाल उतरते ज्यादा देर नहीं लगेगी । मेरा एक ही मकसद है बगावत और खिलाफ़त हर बुराई के खिलाफ़ । मेरी तरफ़ से कभी ऐसी कोई शिकायत नहीं मिलेगी किसी को

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  4. अब क्या कहूँ भाई जी । आप का जलवा देखेंगे ।
    पर मेरे ख्याल में तो आप ऐसे लोगों के खिलाफ़
    साथ साथ कलम का प्रहार भी करते तो और
    अच्छा था । पर आपने जो सोचा । अच्छा ही सोचा
    होगा । इसलिये मुझे आपके बगावत आन्दोलन का
    बेसब्री से इंतजार रहेगा । आपकी इस पोस्ट की
    भावनाओं के अनुसार मैं आपके साथ हूँ ।
    शुभकामनाएं ।
    satguru-satykikhoj.blogspot.com

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