Monday, June 7, 2010
सिर्फ़ बगावत , बगावत और बगावत
मैं बगावती हूं । इस समाज का बगावती । इस देश का बगावती । एक ऐसा बागी जो हर अन्याय हर अपराध चाहे वो बौद्धिक हो या मानसिक के विरूद्ध बगावत करने का मन बना चुका है । ये मेरी पहली और आखिरी पोस्ट होगी । मैं तटस्थ रहकर सिर्फ़ और सिर्फ़ पढने का काम करूंगा । कोई पोस्ट नहीं लिखूंगा । और हर उस ढोल को फ़ाडूंगा जो शोर मचा कर शांति को भंग करने में लग जाते हैं ।मेरा कोई अपना पराया नहीं , मेरे लिए कोई बडा छोटा नहीं । मेरे लिए कोई महान या क्षुद्र नहीं है । और न ही मैं कोई पंच हूं । एक बगावती हूं , सिर्फ़ एक बगावती । अब बगावत का भी असर देखने को तैयार हो जाओ लोगों ।
Subscribe to:
Comments (Atom)